सेंट जोसफ विद्यालय में अनाथ बच्चों को पढ़ाई के साथ ही
निश्शुल्क स्टेशनरी व ड्रेस भी दी जाएगी। प्रवेश के लिए सुबह आठ बजे से शाम
चार बजे तक मोबाइल नं. 7408714714, 7408501555 व 7704908533 पर संपर्क कर
सकते हैं। अभिभावक के मृत्यु प्रमाणपत्र में कोविड से निधन की बात होनी
अनिवार्य है।
जागरण
संवाददाता, लखनऊ: कोरोना काल में हर कोई अपने-अपने तरीके से जरूरतमंदों की
मदद को आगे आ रहा है। सेंट जोसफ विद्यालय ने कोरोना संक्रमण से अनाथ हुए
बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा देने का निर्णय लिया है। समूह की संस्थापक
पुष्पलता अग्रवाल का कहना है कि ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता का कोरोना
संक्रमण से निधन हो गया है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है तो उनकी
पढ़ाई का पूरा खर्च विद्यालय समूह द्वारा किया जाएगा।
विद्यालय
के शिक्षक-शिक्षिकाएं उन बच्चों के लिए माता-पिता एवं अभिभावक के रूप में
काम करेंगे और उनका विशेष ध्यान रखेंगे। वहीं, जिन बच्चों के पिता का निधन
हुआ है, उनकी फीस आधी कर दी जाएगी।
राजाजीपुरम,
ठाकुरगंज, सुशांत गोल्फ सिटी, सीतापुर रोड, मलिहाबाद व रुचि खंड-एक स्थित
शाखाओं में यह सुविधा मिलेगी। संस्थापक अध्यक्ष के निर्णय का अनुपम चौधरी,
राजेश अग्रवाल, सीमा अग्रवाल व अनिल अग्रवाल ने स्वागत किया है।
संक्रमण से अनाथ बच्चों को मिलेगी निश्शुल्क शिक्षा
कोरोना
काल में उप मुख्यमंत्री डा.दिनेश शर्मा ने गुरुवार को अभिभावकों और निजी
संस्थानों की सहूलियत को देखते हुए नया आदेश जारी किया है। इसमें तीन महीने
की फीस इकट्ठा न लेने और बढ़ोतरी न करने की बात कही गई है। स्कूल
प्रबंधकों ने भी सरकार के आदेश का पालन करने का भरोसा दिया है, लेकिन
शुक्रवार को पड़ताल की गई तो हकीकत दावों से इतर थे। सिटी मांटेसरी स्कूल व
लखनऊ पब्लिक स्कूल जैसे बड़े स्कूलों ने कंप्यूटर शुल्क व फीस बढ़ाकर आदेश
को धता बता दिया है। कई स्कूल पहले ही तीन महीने की फीस ले चुके हैं। उनको
लेकर अभिभावक असमंजस में हैं।
सिटी मांटेसरी
स्कूल की महानगर शाखा में कंप्यूटर शुल्क के नाम 920 रुपये लिए गए। कक्षा
नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने 30 अप्रैल को फीस जमा की है।
कंप्यूटर शुल्क के मद में यह पैसा लिया गया। बच्चों के भविष्य को लेकर
अभिभावक चाहते हुए भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इस
बारे में सीएमएस के प्रवक्ता ऋषि खन्ना का कहना है कि आप रसीद की कॉपी
दीजिए, शनिवार को जाऊंगा तो पता करता हूं। सरकार का जो भी निर्देश आया है,
उसका पालन किया जाएगा। फीस के साथ कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा।
राजाजीपुरम के लखनऊ पब्लिक कालेज में पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष फीस
में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
अभिभावक की
ओर से भेजे गए फीस कार्ड में वर्ष 2020-21 में अप्रैल माह की फीस 6,400
रुपये थी तो 2021-22 में 6,650 रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष फीस में
कंप्यूटर की 600 रुपये फीस जुड़ी थी। इस बार कंप्यूटर की फीस तो नहीं ली
गई, लेकिन फीस में 250 रुपये की बढ़ोतरी हो गई, जबकि लखनऊ पब्लिक स्कूल्स
एंड कालेजेस के संस्थापक प्रबंधक डा.एसपी सिंह ने सरकार की ओर दिए गए आदेश
का पालन करने की बात कही है। ये तो सिर्फ बानगी है।
लखनऊ
के कई निजी व मिशनरी स्कूलों की मनमानी जारी है। कई तो तीन महीने से कम
फीस ही जमा ही नहीं करते। एक स्कूल तो कंप्यूटर की फीस को परीक्षा की फीस
में जोड़कर ले रहा है।
फीस का निर्धारण करे सरकार: पीके श्रीवास्तव
पैरेंट्स
वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार द्वारा
जब तक निजी विद्यालयों की फीस का निर्धारण नहीं किया जाएगा, तब तक मनमानी
चलती रहेगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम- 2005 की धारा दो तहत कोरोना संक्रमण को
राष्ट्रीय महामारी की संज्ञा दी गई है। निजी संचालकों को अभिभावकों के बारे
में भी सोचना चाहिए। जिला प्रशासन के माध्यम से कई बार राज्यपाल व
मुख्यमंत्री को फीस निर्धारण का ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं
हुई।
समायोजित होगी फीस
कोरोना
संक्रमण काल को देखते हुए सरकार द्वारा जो आदेश दिए गए हैं, उनका पालन
कराया जाएगा। शासनादेश में स्पष्ट है कि यदि फीस बढ़ाकर ली गई है तो उसे
समायोजित किया जाएगा। यदि कोई विद्यालय तीन महीने की फीस लेने या फिर
एडमीशन फीस लेने का दबाव बनाता है तो अभिभावक जिलाधिकारी द्वारा गठित फीस
नियामक समिति या मेरे कार्यालय में लिखित शिकायत करें। आदेश के बाद कोई फीस
बढ़ाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डा.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
सेंट जोसफ विद्यालय समूह की संस्थापक अध्यक्ष की सराहनीय पहल, जिनके पिता का हुआ है निधन, उनसे लेंगे आधी फीस
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