Sep 15, 2021

68,500 सहायक अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो माह में नियुक्ति करने का दिया निर्देश

 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में एमआरसी अभ्यर्थियों के मामले में एकल पीठ के निर्णय पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। बेसिक शिक्षा परिषद से कहा है कि मेरिट में ऊपर होने के कारण सामान्य वर्ग में चयनित आरक्षित श्रेणी के मेधावी अभ्यर्थियों (एमआरसी) को दो माह में उनकी प्राथमिकता का जिला आवंटित किया जाए। कोर्ट ने सामान्य वर्ग में ऊंची मेरिट के अभ्यर्थियों को भी उनकी पसंद के तीन प्राथमिकता वाले जिलों में किसी एक में पद रिक्त होने पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।



यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने अमित शेखर भारद्वाज सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया है। हालांकि, खंडपीठ ने यह भी कहा है कि निर्णय को नजीर नहीं माना जाएगा।

अपीलों पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा व अशोक खरे सहित कई वकीलों ने बहस की। इसमें एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया था कि बोर्ड ने रिक्तियों की संख्या 68,500 से घटाकर 41,556 कर दी और चयनित अभ्यर्थियों की दो चरणों में काउंसलिंग कराई गई। पहले चरण में 35,420 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग हुई, जबकि दूसरे चरण में 6,136 की। दूसरी काउंसिलिंग की मेरिट में नीचे रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले आवंटित कर दिए गए, जबकि पहली काउंसलिंग में शामिल अधिक मेरिट वाले अभ्यॢथयों को उनकी प्राथमिकता वाला जिला नहीं दिया गया, जो भेदभावपूर्ण है।




अधिवक्ताओं ने कहा कि चयन प्रक्रिया एक ही होने पर बोर्ड विज्ञापित पदों को घटा नहीं सकता। प्रक्रिया को दो हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता। बोर्ड ने मनमाने तरीके से शासनादेश के विपरीत जिलावार रिक्तियों की संख्या घटा दी और एस्पिरेशन वाले जिलों फतेहपुर, चंदौली, सोनभद्र, सिद्धार्थनगर, चित्रकूट धाम, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती में रिक्तियों की संख्या बढ़ा दी, लेकिन पद खाली रह गए। दूसरी काउंसलिंग में शामिल अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले आवंटित कर दिए गए।


एकल पीठ ने मेरिट में ऊपर होने के कारण सामान्य वर्ग में चयनित ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का मानकर प्राथमिकता वाले जिले आवंटित करने का निर्देश दिया था। इसके विरुद्ध अपील करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना था कि यह भेदभावपूर्ण है। यदि आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में चयनित कर लिया गया है और उन्हें प्राथमिकता वाला जिला आवंटित किया जा रहा है तो सामान्य वर्ग में उनसे मेरिट में ऊपर अभ्यर्थियों को भी प्राथमिकता वाला जिला पाने का अधिकार है।

खंडपीठ ने सुनवाई के बाद पक्षकारों की आपसी सहमति के आधार पर निर्णय दिया कि जो चयनित अभ्यर्थी पहले से नियुक्ति पा चुके हैं चाहे वह किसी भी वर्ग के हैं और काम कर रहे हैं, उन्हें उन्हीं स्थानों पर काम करने दिया जाएगा। कोर्ट ने एमआरसी अभ्यर्थियों के संबंध में एकल पीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए कहा कि याचिका करने वाले जिन एमआरसी अभ्यर्थियों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले नहीं आवंटित किए गए हैं, वह दो माह में बोर्ड को प्रत्यावेदन देंगे और बोर्ड एकल पीठ के फैसले के अनुसार उन्हें उनकी पसंद के जिले में दो माह में नियुक्ति देगा।


खंडपीठ ने यह भी कहा कि आदेश सिर्फ अपील में शामिल उन अभ्यर्थियों पर ही लागू होगा, जिनकी याचिकाएं एकल पीठ द्वारा स्वीकार की गईं। इसी प्रकार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी अपनी पसंद के तीन जिलों का विकल्प बोर्ड को देंगे। बोर्ड उन्हें किसी एक जिले में पद रिक्त होने की दशा में नियुक्ति देगा।

68,500 सहायक अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो माह में नियुक्ति करने का दिया निर्देश Rating: 4.5 Diposkan Oleh: tetnews

0 comments:

Post a Comment